कोटमी सोनार क्रोकोडाइल पार्क अकलतरा : Kotmi Sonar Janjgir Chhattisgarh
कोटमी सोनार क्रोकोडाइल पार्क अकलतरा : Kotmi Sonar Janjgir Chhattisgarh

Kotmi Sonar
छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल : Tourism Palaces Of Chhattisgarh
बनावट –
मगरमच्छ संरक्षण केंद्र
का विस्तार 200 एकड़ जमीन पर है। इसमें 85 एकड़ पर जलाशय निर्माण किया गया है।
जलाशय में लगभग 200 मगरमच्छों को उनके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में संरक्षित रखा
गया है। इस जलाशय में 165 मगरमच्छों को अन्य स्थानों से लाया गया है। शेष मगरमच्छ
यहां पूर्व से उपलब्ध थे या वंशवृद्धि किए गए हैं।
जलाशय के चारों ओर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जलस्तर से 10 फीट की दूरी पर डबल लेयर जाली भी लगाई गई है। किनारे परिक्रमा पथ से मगरमच्छों को देखा जा सकता है। इस पार्क में दो मंजिला वाचिंग टावर बनाया गया है। वाचिंग टावर से पूरे परिसर को एक साथ देखा जा सकता है। पर्यटकों के भोजन व जलपान की व्यवस्था के लिए सर्वसुविधायुक्त एक रेस्टोरेंट और बच्चों के लिए आकर्षक झूले लगाए गए हैं। परिसर में सौंदर्यीकरण के लिए लगाए गए पेड़-पौधे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

इतिहास –
इस केंद्र के निर्माण के पूर्व इस स्थान पर कोटमी सोनार गांव का मुढ़ा तालाब था। अनुकूल वातावरण होने के कारण यहां पूर्व से ही मगरमच्छों का निवास था। मगरमच्छ के रहने से यहां गांव में जनहानि या पशुहानि की आशंका बनी रहती थी। इसका समाधान यहां मगरमच्छ संरक्षण केंद्र बनाकर किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 6 मई, 2006 को इस मगरमच्छ संरक्षण केंद्र का शिलान्यास किया था। इस केंद्र को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मगरमच्छ संरक्षण केंद्र के देख रेख करने वाले व्यक्ती कहते है कि यहां प्रतिवर्ष 40 से 50 से हजार पर्यटक आते हैं। राज्य के समीपवर्ती राज्यों सहित विदेशी सैलानियों का भी आगमन होता है। कोटमी सोनार का यह गांव पुराने समय में सोनारो का गांव हुआ करता था जिससे यहां कई सिक्कों से भरी मटकीयां और प्राचीन जेवरात भी मिले हैं कहा जाता है कि यह गांव पहले एक पुरा किला हुआ करता था जो चारों तरफ से घिरा था और यहां के लोग काफी अमीर थे पुरातात्विक विभाग को यहां पुरातन अवशेष भी प्राप्त हुए हैं और इस जगह के पुराने किले को कोटमी सोनार फोर्ट के नाम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एक संरक्षित स्मारक का दर्जा भी प्राप्त है हालांकि अब यहां किले के नाम पर सिर्फ उसके पत्थर ही बचे हुए फिर भी अगर इस जगह को चारों तरफ से देखे तो एैसा लगता हैं मानों की यह पुरा गांव ही किले की दीवारों से घिरा हुआ होगा।
पहुच मार्ग –
यह स्थान बिलासपुर से लगभग 30-35 कि.मी. दूर स्थित हैं आप यहां बिलासपुर से ट्रेन के माध्यम से आ सकते हैं या रोड के सहारे टैक्सी बुक कर आ सकते हैं और जांजगीर चांपा जिला मुख्यालय से यह जगह लगभग 20 कि.मी. की दुरी पर हैं और अकलतरा से 10 की.मी. की दुरी पर है यहाँ आप ट्रेन के माध्यम से भी आ सकते है यहाँ निकटतम रेलवे स्टेशन कोटमी सोनार है।
हमारी राय –
अगर आप शहरो से दूर कही गाव का लुप्त उठाना चाहते है तो यहाँ जरुर आइये आपको काफी अच्छा लगेगाआप यह परिवार से साथ भी बहुत मजे कर सकते है यह बहोत बड़ा बगीचा और झूले भी है यहाँ आप जब चाहे तब आ सकते है यह हमेशा देखने लायक रहते है…
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